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बिहार के भागलपुर जनपद के युवा बृजेश की पीड़ा सरकार को सुनना चाहिए और युवा भाई बृजेश के सुझाव पर गम्भीरता से विचार करना चाहिए।

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मैं देश की राजधानी नई दिल्ली में फुटपाथ के पास लगी दुकान पर नाश्ता कर रहा था, तो मैंने बिहार के भागलपुर जनपद के रहने वाले युवा बृजेश की बातों में उसकी पीड़ा को चुपचाप सुनता रहा, भाई बृजेश मोची का कार्य करता है, वह भाई किसी के द्वारा अपमान से दुखी लग रहा था और कह रहा था हमें हीनता के साथ बिहारी कोई बोलता है, तो अच्छा नहीं लगता। युवा बृजेश की बिहार से रोजगार के कारण पलायन को लेकर भी बड़ी पीड़ा थी, उसने सरकार से आह्वान किया कि अगर सरकार हमें बिहार में बंजर या बेकार पड़ी भूमि पर उगाने के लिए खेती किसानी के लिए खेतिहर मजदूर का वेतन दे, तो हम बाहर क्यों रोजगार की तलाश में पलायन करें। युवा भाई बृजेश का दर्द जायज था। फिर मैंने उन्हें हाल ही में बिहार के समस्तीपुर जनपद व सिवान जनपद के दौरे के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि बिहार देश के सर्वश्रेष्ठ राज्यों में से एक है, बिहार आज रोड, रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर व शिक्षा के मामले में किसी भी राज्य से कम नहीं, बाहर जब जंगलराज हुआ करता था, तब की छवि बनी है। इसलिए आज मैं माननीय मुख्यमंत्री बिहार श्री Nitish Kumar  जी से निवेदन करना चाह...

माननीया राज्यपाल, उत्तर प्रदेश श्रीमती आनन्दीबेन पटेल जी से भेंट में " गांव किसान उन्नयन " संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पी सिंह ठैनुआं जी ने बृज क्षेत्र के महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए व गाजियाबाद जनपद का नाम "चौधरी चरण सिंह पुरम" रखने का अनुरोध किया।

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दिनांक 4 मई, 2024 को माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष , गांव किसान उन्नयन के पी सिंह ठैनुआं जी ने लखनऊ स्थित राजभवन में महामहिम राज्यपाल महोदया, श्रीमती आनन्दीबेन पटेल जी से भेंट कर उनको बृज क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं से व प्रमुख मांगों से अवगत कराया जिसमें पहला मुद्दा रखा कि मथुरा जनपद के बल्देव ब्लॉक स्थित बृज के राजा व भगवान श्री कृष्ण जी के ज्येष्ठ भ्राता हलधर " दाऊजी महाराज" मन्दिर तीर्थ स्थल का जीर्णोद्धार व कोरिडोर का निर्माण हो और वर्षों से लम्बित बरौली - कैलाश मन्दिर सम्पर्क मार्ग का निर्माण कार्य जल्द से जल्द गुणवत्तापूर्ण सम्पन्न हो । दुसरा मुद्दा उठाया कि हाथरस जनपद के सादाबाद में भारत रत्न "चौधरी चरण सिंह मैमोरियल" का निर्माण हो। तीसरा बिन्दु रखा कि बृज क्षेत्र के आगरा जनपद में स्थित सादाबाद ब्लॉक में या आगरा जनपद के खन्दौली ब्लॉक या मथुरा जनपद के बल्देव ब्लॉक में ही किसी एक जगह कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना हो । चौथा मुद्दा रहा कि आगरा, हाथरस, फिरोजाबाद व मथुरा से होकर जाने वाली नहरों , माइनरों में नियमित पानी न आने की बड़ी समस्या का समाधान हो सके। पांचवां मुद...

किसान मसीहा दीनबंधु सर छोटूराम जी की जयंती पर प्रधानमंत्री भारत सरकार श्री नरेंद्र मोदी जी से देश के किसानों के लिए किसान आयोग के गठन की अपील: चौधरी के पी सिंह ठैनुआं

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मैं चौधरी के पी सिंह ठैनुआं किसान मसीहा दीनबंधु सर छोटूराम जी के आदर्शों से बहुत प्रभावित हूं, क्योंकि मुझे भी गांव किसान की समृद्धि के लिए संघर्षरत रहने की प्रेरणा उनके जीवन से मिली, क्योंकि मैंने बचपन में किसान परिवार की आर्थिक तंगी को बड़ी करीबी से देखा है। आज भारत जब विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बड़ी होने की तरफ अग्रसर है , वहां किसान आज आर्थिक असमानता का शिकार होता जा रहा है। किसान मसीहा दीनबंधु सर छोटूराम जी का जन्म हरियाणा के रोहतक के छोटे से गांव के जाट किसान परिवार में हुआ, उन्होंने अपने पिता जी को उनकी पढ़ाई के लिए साहूकार से कर्ज के लिए अपमानित होते हुए देखा, यहीं से उन्होंने अपना जीवन गांव किसान के हितों के लिए समर्पित कर दिया और अंग्रेजों के शासनकाल में किसान मजदूरों की आवाज बुलंद की और किसानों के लिए उस समय की सरकार द्वारा किसान विरोधी कानूनों में परिवर्तन के लिए पराधीन भारत की सरकार से संघर्ष किया और सफल हुए। सर छोटूराम जी की शिक्षा उनकी ताकत बनी और वह अपने वेतन का बड़ा हिस्सा शिक्षण संस्थानों में दे दिया करते थे। उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में 22 हजार युव...

श्री अन्न ( मिलेट्स) के उत्पादन व उपभोग के लिए जन जागरूकता क्यों आवश्यक है? यह भारत की पहल पर कैसे बना वैश्विक मुद्दा, सुनिए इस महत्वपूर्ण वीडियो सन्देश को ओर पढ़िये लेख : चौधरी के पी सिंह ठैनुआं

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सुनिए श्री अन्न के बारे में महत्वपूर्ण वीडियो सन्देश श्री अन्न (मिलेट्स) पर उत्तर प्रदेश के हाथरस जनपद से किसान नेता चौधरी के पी सिंह ठैनुआं जी ने पूरे भारत में गांव गांव शहर शहर जन जागरूकता के लिए अभियान की शुरुआत की है, वीडियो सन्देश के माध्यम से उन्होंने इस जन जागरूकता अभियान के उद्देश्यों को बड़ी स्पष्टता से बताया और श्री अन्न ( मिलेट्स) के उत्पादकों व उपभोक्ताओं के प्रोत्साहन के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकारों की जमकर सराहना की , कहा ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी फसल पर 50% एम एस पी बढ़ाया गया हो। साथ ही कहा कि हर जन सामान्य को #internationalyearofmillets2023 #IYM2023 अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष 2023 के उद्देश्यों के बारे में जैसे कुपोषण से लड़ना, खाद्यान्न संकट से निपटना, जल संरक्षण में योगदान आदि लाभों को लेकर विस्तारपूर्वक जानकारी होनी चाहिए । इसके लिए पहले उन्होंने पैतृक खेतों में 27.5 क्विंटल बाजरा उत्पादन करके छोटी सी शुरुआत की और उनके हाथरस जनपद के चिरावली गांव के खास किसान बाबा श्री महावीर सिंह जी ने सरकार खरीद केंद्र पर बाजरा को 2500 रूपए प्रति क्विंटल एम एस पी पर बेचा भी...

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी की करारी हार या 2024 के लिए करारा सबक, सुनिए भाजपा को समर्थन देने वाले भारतीय किसान यूनियन भानू संगठन द्वारा किसान के मन की बात, क्यों है केन्द्र में 2024 से पहले किसान आयोग का गठन जरूरी।

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कर्नानाटक विधानसभा चुनाव 2023 परिणाम व यूपी नगर निकाय चुनाव परिणाम के बाद भारतीय किसान यूनियन भानू का बयान । विस्तृत: यूपी के नगर निकाय चुनावों में 17 नगर निगम में से 17 पर भारतीय जनता पार्टी की भारी जीत के लिए बहुत-बहुत बधाई, गौरतलब है कि भारतीय किसान यूनियन भानू के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह जी ने नगर निकाय चुनावों में उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की प्रशंसा करते हुए उनकी कार्यशैली से प्रभावित होकर भारतीय जनता पार्टी को खुला समर्थन दे दिया था। लेकिन साथ ही मैं चौधरी केपी सिंह ठैनुआं, प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता भारतीय किसान यूनियन भानू के रूप में भारतीय जनता पार्टी को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में करारी हार पर भारतीय किसान यूनियन भानू की तरफ से स्पष्ट व स्वच्छ सलाह देना चाहूंगा कि वह अब भारतीय किसान यूनियन भानू की प्रमुख मांग "केन्द्र में किसान आयोग के गठन" को पूरा करने का जल्दी से जल्दी विचार करे, क्योंकि भारतीय किसान यूनियन भानू के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन भानू ठाकुर भानु प्रताप सिंह जी ने 2014 में कांग्रेस...

उस अन्नदाता किसान की कौन सुनेगा, जिनकी रात भी काली और किस्मत भी काली, आवारा गौवंश का समाधान कब करेगी सरकार?

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मित्रों कुछ पीड़ा ऐसी होती हैं जो दिखती सबको हैं, लेकिन उस पीड़ा को समझता कोई नहीं, जिस देश में लाख करोड़ों रुपए के हाइवेज बनते हैं, इन्फ्रास्ट्रक्चर बनते हैं, वहीं इस देश का अन्नदाता किसान जब आवारा गौवंश की समस्या के कारण अपनी फसल को बचाने के लिए सही से सो नहीं पाता। इस मुद्दे पर न बड़ा बजट सरकार के पास है और नहीं समाज के अन्य वर्गों के पास सोचने के लिए समय , हाल ही में मैं गुजरात हाईकोर्ट की टिप्पणी एक अखबार में प्रकाशित समाचार में पढ़ रहा था तो उसमें लिखा था "गौ हत्या बन्द हो जाए तो पूरे विश्व की समस्यायों का समाधान हो जाएगा" । मैं उत्तर प्रदेश के बृज क्षेत्र से हूं तो सोच रहा था कि इस समस्या के समाधान के लिए माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार श्री योगी आदित्यनाथ महाराज जी तक अपनी बात पहुंचाऊं, लेकिन जब मैं गुजरात व अन्य राज्यों में गया तो गौ माता की दशा देखकर लगा कि यह तो सम्पूर्ण भारत की समस्या है, ये सही बात है कि इस समस्या का जिम्मेदार कहीं न कहीं समाज सबसे ज्यादा है, लेकिन अब माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार श्री नरेंद्र मोदी जी को इस समस्या के समाधान के लिए अपने मंत...

पूछते हैं 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले 2023 के आम बजट पेश होने से पहले कृषि सेक्टर के पी एम मोदी से कुछ महत्वपूर्ण सवाल।

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पिछले वर्ष मैंने कृषि सेक्टर से जुड़े कुछ अहम मुद्दों पर इण्डिया टुडे ग्रुप के गुड न्यूज टुडे चैनल पर आम बजट में अपनी खुलकर राय रखी थी , लेकिन क्या 2024 लोकसभा चुनाव से पहले देश की माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार श्री नरेंद्र मोदी जी के मंत्री मंडल की माननीय वित्त मंत्री, भारत सरकार श्रीमती निर्मला सीतारमण जी पिछले वर्ष के आम बजट से जो 4% प्रतिशत के आसपास दिया था, उससे ज्यादा बजट कृषि सेक्टर को देंगी या नहीं, इसी से साफ हो जाएगा, कोविड काल में देश‌ की अर्थव्यवस्था को संजीवनी देने वाले अन्नदाता किसान के कृषि सेक्टर को क्या तवज्जो दी जाती है। देश का अन्नदाता किसान केन्द्र सरकार के जैविक व प्राकृतिक खेती मिशन व अन्य आधुनिक विकास की सोच के साथ है, लेकिन आर्थिक असमानता के शिकार के अभी भी महत्वपूर्ण निम्न सवाल केन्द्र सरकार के मुखिया माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार श्री नरेंद्र मोदी जी से अराजनैतिक रूप से तो बनते ही हैं। 👉 देश के किसानों के लिए केन्द्र में #किसान_आयोग का गठन कब ? देश में सबके आयोग, लेकिन किसान आयोग क्यों नहीं, जिसके अध्यक्ष व सदस्य किसान हों, जिस प्लेटफार्म पर अन्नदाता किसान...

युवा सशक्तिकरण सबसे आवश्यक है। जानिए क्या बिन्दु हैं, जिन पर सरकारों को कार्य करना चाहिए।

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#युवा_सशक्तिकरण_सबसे_आवश्यक : आज वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर हम कह सकते हैं हमारा हुआ जो देश का भविष्य तय करता है, उसके हालात संघर्षपूर्ण तो हैं ही किंतु से शारीरिक मानसिक तौर पर तोड़ देते हैं। युवा भारत की ताकत है, जब तक इनके लिए व्यक्तित्व निर्माण , स्किल डेवलपमेंट, रोजगार प्रबंधन, नशा मुक्ति अभियान, मानसिक तनाव रहित शिक्षा नहीं होगी तब तक युवा सशक्तिकरण असंभव है।

कृषि प्रधान देश की पहचान व किसान की देश की प्रगति में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका के बाद भी देश में किसान आयोग का गठन क्यों नहीं?

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कृषि प्रधान देश की पहचान व किसान की देश की प्रगति में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका के बाद भी देश में किसान आयोग का गठन क्यों नहीं?  कृषि प्रधान देश की पहचान होने के बाद भी हमारे देश में किसान आयोग का गठन क्यों नहीं किया गया है? यह बहुत बड़ा प्रश्न है, जबकि किसानों व सरकारों के बीच संवाद की कमी से हमेशा कृषि सुधार के लिए लाई जाने वाली नीतियों पर सरकार और किसानों के बीच लगातार टकराव देखने को मिला है। हाल ही में बात की जाए तो एक साल से ज्यादा समय तक चले किसान आन्दोलन में भी किसानों और सरकारों के बीच संवाद की कमी के कारण कृषि सुधार के लिए लाये गये तीनों कृषि कानून सुधार की जगह वापस हुए। इससे पहले RCEP मुक्त व्यापार समझौते पर भी सरकार को किसानों के साथ संवाद की कमी से पीछे हटना पड़ा। दोनों ही मामले में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को अपना फैसला बदलने का निर्णय लेना पड़ा। पहले की भी सरकारों में विश्व व्यापार संगठन के दबाव में सरकारों ने किसानों से बिना राय लिए हुए बहुत सारे समझौतों पर हस्ताक्षर की कोशिश की या समझौते कर दिए, जिनका प्रभाव वर्तमान किसानों की आर्थिक परिस्थिति पर ह...

आओ चलें गांव की ओर

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आत्मनिर्भर गांव की कल्पना बिना आत्मनिर्भर गांव के असम्भव है, गांव से ही भारतीय संस्कृति का उदय हुआ है। आज स्मार्ट शहर बनाने की बात की जाती है, तो स्मार्ट गांव की भी हो।  स्मार्ट गांव कैसे हों , इस पर वर्तमान परिस्थितियों व जरूरतों के विश्लेषण की आवश्यकता है। 1- ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं गांव ‌ आज आधुनिकीकरण की दौड़ में ग्लोबल वार्मिंग की बढ़ती समस्याओं ने मानव को‌ ग्रीन बिल्डिंग मौडल पर कार्य करने के लिए मजबूर कर दिया है, जबकि ग्रीन बिल्डिंग तकनीकी गांव की संस्कृति में पहले से ही है, बस हमें गांव के पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाना है।  2- गांव के स्मार्ट प्रबन्धन की आवश्यकता है गांव आज भी सरकारी योजनाओं के लचर क्रियान्वयन व सरकारी तंत्र के भ्रष्टाचार के शिकार हैं। सरकार के आवंटित बजट का बड़ा हिस्सा, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है।  सरकारी योजनाओं का सही लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचाये। पूरे देश को एक स्मार्ट एप से जोड़े केन्द्र सरकार, जिसमें नागरिकों के डाटा के साथ सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का भी पता लगे और फीडबैक ओप...

दीवाली पर ही नहीं सदैव मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग करें।

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भारतीय संस्कृति में मिट्टी के बने बर्तनों का प्रयोग अति उत्तम माना जाता है। आधुनिकीकरण के मिथ्य से हटकर समाज प्रकृति की तरफ जाने की आवश्यकता को महसूस कर रहा है, क्योंकि पर्यावरण में प्रदूषण समाज के लिए बड़ी चुनौती बना है। इसलिए हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए छोटे से छोटे मुद्दों पर बारिकी से अध्ययन करना चाहिए।  विस्तृत   Follow on Twitter @kpsinghthainuan    #jhoprisesansadtak

गौमाता ही अर्थव्यवस्था का आधार

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#गौ_संरक्षण_के_लिए_समाज_और_सरकार_दोनों_को_लेनी_पड़ेगी_गम्भीरता_पूर्वक_जिम्मेदारी #सरकार 👇 👉1- सम्पूर्ण भारत में गौ वध पर कठोर कानून लागू करे केंद्र सरकार, जिससे गौ वध पर प्रभावी रोक लगे। 👉2- एम एस एम ई योजनाओं में गौ आधारित उत्पादों के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को स्थापित करे सरकार और उनको प्रशिक्षण के द्वारा मार्केटिंग प्लेटफॉर्म व प्रबंधन सहायता उपलब्ध कराये सरकार  👉3- भारत सरकार को अत्यधिक मात्रा की आवश्यकतानुसार लाखों टन यूरिया व डी ए पी आयात करना पड़ता है, सरकार गौ प्रबंधन के माध्यम से गोबर के खाद की खेती की तरफ ले जाने के लिए जागरुकता कार्यक्रम चलाए। 👉4- गौ उत्पादों पर भारत सरकार सब्सिडी दे। 👉5- मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत  सरकार, गौमाता पर विश्वविद्यालयों में रिसर्च एवं डेवलपमेंट के लिये इंजीनियरिंग, प्रबंधन, सामाजिक, स्वास्थ्य व वाणिज्य सम्बन्धी विषयों के छात्रों को प्रोत्साहित कर नौकरियों में प्राथमिकता दे। #समाज वर्तमान स्वास्थ्य चुनौतियों का अवलोकन करने के बाद पाया गया है, कि मानव समाज जितना प्रकृति से दूर हुआ है, उतना वह संकट में पड़ा...

आज सोचा अपने जन्मदिन पर एक युवा के रूप में सभी देश के युवाओं के लिए अपना सन्देश लिखूं।

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आज मैं 30 साल का हो गया हूं , युवा के रूप में अपने कुछ अनुभव साझा कर रहा हूं कि युवाओं की भागीदारी राष्ट्र निर्माण में कितनी अहम है और युवा इसे कैसे समझें। यह मेरा अधिकारिक वेबसाइट है, अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें हमारी वर्तमान सामाजिक परिस्थितियां आगामी भविष्य को बहुत ही प्रभावित कर रही हैं, इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, हमारा युवा वर्ग जो बेरोजगारी, नशाखोरी, खान पान व मानसिक दबाव आदि से बहुत ही गम्भीर तरीके से प्रभावित हो रहा है। ज्यादातर युवाओं के सपने ही उनको दिशाहीन कर रहे हैं, इसलिए आवश्यक है युवा सशक्तिकरण योजनाओं की। जैसे: 1- व्यक्तित्व निर्माण शिक्षा‌ 2- योग्यतानुसार रोजगार गारंटी। 3- नशीले पदार्थों पर प्रभावशाली प्रतिबन्ध व नशा मुक्ति। 4- सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों में युवाओं का प्रशिक्षण व प्रोत्साहन। 5-युवाओं को भारतीय संस्कृति व इतिहास की शिक्षा। युवाओं का सम्मान व ध्यान रखने की सरकारों की अहम जिम्मेदारी व प्राथमिकता होनी चाहिए।

किसान को पक्ष, विपक्ष या अराजनैतिक किसान नेता स्वार्थ का नहीं, समाधान का मुद्दा बनायें।

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मैं देख रहा हूं किसान वर्ग जो आर्थिक असमानता का शिकार हो गया आज पूरे कृषि प्रधान देश भारत को उनके साथ खड़े होने की आवश्यकता है। किसानों की बदहाली को देखते हुए पहले भी किसान आन्दोलन हुए लेकिन उन किसान आन्दोलनों में ज्यादातर राजनीतिक स्वार्थ या मंशा का शिकार नहीं हुये थे।  लेकिन वर्तमान में किसान का मुद्दा राजनीतिक मंशा वाले लोगों द्वारा भेंट चढ़ा दिया जाय, यह देश के भविष्य और सुरक्षा को लेकर ठीक नहीं है। आज पीड़ित किसान वर्ग विशाल समुद्र के किनारे पर खड़ा ज्यादातर दिखावटी किसान हितैषियों से बचने की कोशिश कर विवशता पूर्वक देख रहा है कि कोई उसकी समस्याओं का समाधान करे। किसान आज सत्ता, विपक्ष और वर्तमान आन्दोलनकारियों तीनों से मन ही मन सूक्ष्म विश्वास के साथ सवाल कर रहा है कि मेरी समस्याओं का समाधान कब तक होगा? आज मैं बड़े ही भावुकता के साथ इसलिए लिख रहा हूं कि किसान की आवाज कहीं दब न जाय और अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर विश्वास भी है कि किसान कल्याण अवश्य होगा। पहले बात सरकार की ही कर लेते हैं कि माननीय व यशस्वी प्रधानमंत्री, भारत सरकार श्री नरेंद्र मोदी जी ने किसानों के ल...

मुद्दा जो भी हो #राष्ट्रीय #सुरक्षा और #स्वाभिमान से बड़ा नहीं हो सकता !

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मेरा यह विषय राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को लेकर है, देश पर जब जब कोई संकट आया, जनता और सरकार ने अपना स्वाभिमान और सुरक्षा के लिए सामंजस्य बिठाया! इसी वजह से हम देश के सामने आई हर चुनौती से मिलकर लड़े और जीत भी हासिल की! पिछले लगभग 3 महीनों से दिल्ली के चारों ओर अन्नदाता अपने अधिकारों के संघर्ष के लिए आया था,  सरकार से अपनी बात कहने और वार्ता अच्छे सकारात्मक दिशा में आगे भी बढ़ती दिख रही थी! यह हमारे देश का आंतरिक मामला था और संविधान में दिये अधिकार के अनुसार अन्नदाता को आवाज उठाने का अवसर भी मिला!‌ माना कि कानून गलत थे और यह भी किसी से नहीं छुपा है कि वैश्विक नीतियों के दवाब के चलते सरकारों ने किसान और मजदूर को आर्थिक असमानता की तरफ से धकेल दिया है! मेरा यह विचार किसी के पक्ष में नहीं है यहां सरकारों और किसान नेताओं से अपने आंतरिक मामलों में सुलह के लिए निवेदन है, क्योंकि समाधान एक पक्ष के बारे में ही सुनने से नहीं होगा या बड़ी बात हमको जानना चाहिए कि कहीं भी सुलह का रास्ता खुलता है तो दोनों पक्षों को कुछ बिंदुओं पर तो सहमति बनानी होगी या पीछे हटना पड़ेगा, जिससे अन्नदाता के...

आर्थिक असमानता का शिकार किसान, यह राष्ट्र हित में नहीं!

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बहुत ही प्रचलित ग्रामीण कहावत है कि "उत्तम खेती मध्यम बान निषिद्ध चाकरी भीख निदान" ! लेकिन आज के हालातों को देखते हुए यह कहावत विपरीत साबित हो रही है! जहां 200 वर्ष गुलामी के पश्चात आजादी पाकर भारत ने कृषि क्षेत्र का ही सहारा लेकर इस देश को विकासशील देश की कतार में भारत सरकार खड़ा करने में सफल रही लेकिन लगता है कि आज हमारी सरकारें पिछले 30 सालों से फिर से वैश्विक नीतियों के दवाब में आकर अपनी कृषि प्रधान संस्कृति की पहचान को संकट में डाल रही हैं! जिस देश की आधी से ज्यादा आबादी कृषि पर ही आधारित हो वहां आज हालात बद से बदतर हो गए हैं! हम पहले पिछले 20 सालों के हालात पर ही चर्चा करें तो, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार हर 31 वें मिनट में एक अन्नदाता कर्ज के चलते आत्महत्या कर रहा है!  पिछले 30 सालों में 3.5 लाख से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की हैं! NSSO 2013 के अनुसार किसान परिवार की सभी स्रोतों से आय औसतन 6426 रुपए प्रति महीने है जिसमें से 17 राज्यों में मात्र 1700 रुपए महीने के आस-पास है, अगर इसको प्रति व्यक्ति आय के तौर पर देखा जाए तो प्रति व्यक्ति...