उस अन्नदाता किसान की कौन सुनेगा, जिनकी रात भी काली और किस्मत भी काली, आवारा गौवंश का समाधान कब करेगी सरकार?
मित्रों कुछ पीड़ा ऐसी होती हैं जो दिखती सबको हैं, लेकिन उस पीड़ा को समझता कोई नहीं, जिस देश में लाख करोड़ों रुपए के हाइवेज बनते हैं, इन्फ्रास्ट्रक्चर बनते हैं, वहीं इस देश का अन्नदाता किसान जब आवारा गौवंश की समस्या के कारण अपनी फसल को बचाने के लिए सही से सो नहीं पाता। इस मुद्दे पर न बड़ा बजट सरकार के पास है और नहीं समाज के अन्य वर्गों के पास सोचने के लिए समय , हाल ही में मैं गुजरात हाईकोर्ट की टिप्पणी एक अखबार में प्रकाशित समाचार में पढ़ रहा था तो उसमें लिखा था "गौ हत्या बन्द हो जाए तो पूरे विश्व की समस्यायों का समाधान हो जाएगा" । मैं उत्तर प्रदेश के बृज क्षेत्र से हूं तो सोच रहा था कि इस समस्या के समाधान के लिए माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार श्री योगी आदित्यनाथ महाराज जी तक अपनी बात पहुंचाऊं, लेकिन जब मैं गुजरात व अन्य राज्यों में गया तो गौ माता की दशा देखकर लगा कि यह तो सम्पूर्ण भारत की समस्या है, ये सही बात है कि इस समस्या का जिम्मेदार कहीं न कहीं समाज सबसे ज्यादा है, लेकिन अब माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार श्री नरेंद्र मोदी जी को इस समस्या के समाधान के लिए अपने मंत्री मंडल, वरिष्ठ अधिकारियों, समाजसेवियों, किसान नेताओं व किसानों आदि की राय जानकर, बजट में बिना लोभ किये इस समस्या के समाधान के लिए एक ड्रीम प्रोजेक्ट बनाना चाहिए, जिसे स्वच्छ भारत व अन्य बड़े अभियानों की तर्ज पर पूरे देश में लागू किया जाए। जहां सभी मुख्यमंत्री अपने अपने राज्यों में विभिन्न विभिन्न व्यापार के लिए अनुकूलित परिस्थितियां होने का दावा कर रहे हैं, उन सभी मुख्यमंत्रियों को अपने अपने राज्यों में आवारा गौवंश की समस्या के समाधान के लिए सोचना पड़ेगा। कृषि गौ वाणिज्यम् के सिद्धांत पर हमें अपने देश को पूरे विश्व में सबसे अलग पहचान दिलानी होगी। ग्लोबल वार्मिंग की वैश्विक समस्या से जूझने में भी "कृषि गौ वाणिज्यम्" अपनी अच्छी भूमिका निभा सकता है। माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार श्री नरेंद्र मोदी जी आजादी के 75 वें अमृत महोत्सव पर हमें परम्परागत कृषि को बढ़ावा देने के लिए लालकिले से बड़ा सन्देश दिया था, गंगा किनारे औरगैनिक गलियारे की भी बात बजट 2022 में हुई थी, यह बहुत ही सकारात्मक पहले हैं आने वाले 25 वर्षों में देश को प्रगति पर ले जाने के लिए, लेकिन भारत सरकार व राज्य सरकारें आर्थिक सम्पन्नता, नागरिकों के अच्छे स्वास्थ्य व भौतिक विकास को ही बढ़ावा देना चाहती हैं, तो उन्हें समझ लेना चाहिए, गौ माता से ज्यादा कुबेर का खजाना कहीं नहीं मिलेगा। इस समस्या के समाधान से नागरिकों को स्वास्थ्य लाभ, पौष्टिक खाद्यान्न, ग्लोबल वार्मिंग समस्या के समाधान, गौ आधारित ग्रीन प्रोजेक्ट्स के मौडल से हम पूरी दुनिया को मौडल देकर विश्व गुरु पुनः बन सकते हैं, इसमें सामाजिक संस्थाओं का भी अहम योगदान हो सकता है। यमुना एक्सप्रेस वे पर गांव चौगान खन्दौली ब्लॉक आगरा जनपद के किसान सुभाष बघेल जी ने कहा कि सरकार इन आवारा गौवंश की समस्या का समाधान करे तो जान बचे।
Regards,
के पी सिंह ठैनुआं
प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता
भारतीय किसान यूनियन भानू
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