संदेश

फ़रवरी, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मुद्दा जो भी हो #राष्ट्रीय #सुरक्षा और #स्वाभिमान से बड़ा नहीं हो सकता !

चित्र
मेरा यह विषय राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को लेकर है, देश पर जब जब कोई संकट आया, जनता और सरकार ने अपना स्वाभिमान और सुरक्षा के लिए सामंजस्य बिठाया! इसी वजह से हम देश के सामने आई हर चुनौती से मिलकर लड़े और जीत भी हासिल की! पिछले लगभग 3 महीनों से दिल्ली के चारों ओर अन्नदाता अपने अधिकारों के संघर्ष के लिए आया था,  सरकार से अपनी बात कहने और वार्ता अच्छे सकारात्मक दिशा में आगे भी बढ़ती दिख रही थी! यह हमारे देश का आंतरिक मामला था और संविधान में दिये अधिकार के अनुसार अन्नदाता को आवाज उठाने का अवसर भी मिला!‌ माना कि कानून गलत थे और यह भी किसी से नहीं छुपा है कि वैश्विक नीतियों के दवाब के चलते सरकारों ने किसान और मजदूर को आर्थिक असमानता की तरफ से धकेल दिया है! मेरा यह विचार किसी के पक्ष में नहीं है यहां सरकारों और किसान नेताओं से अपने आंतरिक मामलों में सुलह के लिए निवेदन है, क्योंकि समाधान एक पक्ष के बारे में ही सुनने से नहीं होगा या बड़ी बात हमको जानना चाहिए कि कहीं भी सुलह का रास्ता खुलता है तो दोनों पक्षों को कुछ बिंदुओं पर तो सहमति बनानी होगी या पीछे हटना पड़ेगा, जिससे अन्नदाता के...

आर्थिक असमानता का शिकार किसान, यह राष्ट्र हित में नहीं!

चित्र
बहुत ही प्रचलित ग्रामीण कहावत है कि "उत्तम खेती मध्यम बान निषिद्ध चाकरी भीख निदान" ! लेकिन आज के हालातों को देखते हुए यह कहावत विपरीत साबित हो रही है! जहां 200 वर्ष गुलामी के पश्चात आजादी पाकर भारत ने कृषि क्षेत्र का ही सहारा लेकर इस देश को विकासशील देश की कतार में भारत सरकार खड़ा करने में सफल रही लेकिन लगता है कि आज हमारी सरकारें पिछले 30 सालों से फिर से वैश्विक नीतियों के दवाब में आकर अपनी कृषि प्रधान संस्कृति की पहचान को संकट में डाल रही हैं! जिस देश की आधी से ज्यादा आबादी कृषि पर ही आधारित हो वहां आज हालात बद से बदतर हो गए हैं! हम पहले पिछले 20 सालों के हालात पर ही चर्चा करें तो, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार हर 31 वें मिनट में एक अन्नदाता कर्ज के चलते आत्महत्या कर रहा है!  पिछले 30 सालों में 3.5 लाख से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की हैं! NSSO 2013 के अनुसार किसान परिवार की सभी स्रोतों से आय औसतन 6426 रुपए प्रति महीने है जिसमें से 17 राज्यों में मात्र 1700 रुपए महीने के आस-पास है, अगर इसको प्रति व्यक्ति आय के तौर पर देखा जाए तो प्रति व्यक्ति...